| भारत में राष्ट्रवाद के उदय के क्या कारण थे ? |
तो आज हम सब भारत के इतिहास के बारे में जानेगे कि भारत में राष्ट्रवाद का शुरूआत कैसे और क्यो हुआ।
तो आज भारत में राष्ट्रवाद के बारे में जानेगे।
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| भारत में राष्ट्रवाद |
भारत में राष्ट्रवाद
घटना :-
- हड़प्पा सभ्यता/सिंधु घाटी सभ्यता---------2500 BC से 1750 BC तक
- वैदिक सभ्यता -------- 1500 BC से 600 BC तक
- महाजनपद काल ----- 600 BC से 300 BC तक
- मौर्य वंश ---------------------- 321 BC से 184 BC तक
- मौर्योत्तर काल ---------- 184 BC से 320 AD तक
- गुप्त काल --------------- 320 AD से 554 AD तक
- गुप्तोत्तर काल ------- 554 AD से 712 AD तक
- मध्य काल --------------------- 712 AD से 1757 तक
(क) सल्तनत काल ----------- 1206 ई० से 1526 ई० तक
- गुलाम वंश :- गुलाम वंश 1206 ई० से 1290 ई० तक शासन किया तथा इसका संस्थापक कुतुबुद्दीन एबक था।
- खिल्जी वंश :- खिल्जी वंश 1290 ई० से 1320 ई० तक शासन किया तथा इसका संस्थापक जलालुद्दीन फिरोज खिल्जी था। इस वंश का अंतिम शासक अलाउद्दीन खिल्जी था।
- तुगलक वंश :- तुगलक वंश 1320 ई० से 1398 ई० तक शासन किया तथा इसका संस्थापक ग्यासुद्दीन तुगलक था।
- सैयद वंश :- सैयद वंश ने 1414 ई० से 1451 ई० तक शासन किया तथा इसका संस्थापक खिज्र खाँ था।
- लोदी वंश :- लोदी वंश 1451 ई० से 1526 ई० तक शासन किया तथा इसका संस्थापक बहलोल लोदी था।
- बाबर ---------- 1526 ई० से 1530 ई० तक
- हुमायूं ---------- 1530 ई० से 1556 ई० तक
- अकबर ---------- 1556 ई० से 1605 ई० तक
- जहांनगीर -------- 1605 ई० से 1627 ई० तक (इसी के समय कैप्टन हाकिन्स भारत आया था )
- शाहजहाँ --------- 1627 ई० से 1658 ई० तक
- औरंगजेब -------- 1658 ई० से 1707 ई० तक
- 1600 ई० :- ब्रिटेन मे ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना ।
- 1757 ई० :- पलासी का युद्ध - बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच हुआ, जिसमें सिराजुद्दौला पराजित हुआ।
- 1764 ई० :- बक्सर का युद्ध
- 1852 ई० :- लॉर्ड डलहौजी द्वारा हड़प नीति लागू किया गया।
- 1857 ई० :- प्रथम स्वतंत्रता संग्राम -- सिपाही विद्रोह
- 1858 ई० :- भारत ब्रिटेन का उपनिवेश बन गया।
- 1885 ई० :- अखिल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस कि स्थापना । {मुम्बई के गोकुल दास तेज पाल ने संस्कृत विद्यालय में संस्थापक ए ओ ह्यूम तथा अध्यक्ष- डब्ल्यू सी० बनर्जी (ब्योमेश चन्द्र बनर्जी)}
- 1905 ई० :- बंगाल का विभाजन (कर्जन द्वारा)
- 1906 ई० :- मुस्लिम लीग कि स्थापना।
- 1907 ई० :- कांग्रेस का सूरत अधिवेशन, कांग्रेस में विभाजन (नरम दल तथा गरम दल के रूप में)
- अखिल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस :- 1857 ई० कि क्रांति के बाद कुछ लोगो ने (इंडियन एशोशिएशन) नामक एक राजनैतिक संगठन बनाया जो अंग्रेजो से अपने हक की बात करता था। लेकिन यह संगठन असफल रहा।
एक अंग्रेज अधिकारी ए० ओ० ह्यूम ने इंडियन एसोसिएशन को ही विस्तृत रूप देते हुए 25 से 28 दिसम्बर 1885 ई० में मुम्बई के गोकुल दास,तेज पाल संस्कृत विद्यालय में अखिल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस कि स्थापना की जिसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे।
- अखिल भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस का उद्देश्य (AINC) :-
- शुरूआती दौर में इसका उद्देश्य उदारवादी था ।
- ये राष्ट्र एकता में कायम करना चाहते थे।
- यह पूरे भारत का नेतृत्व करना चाहते थे।
- यह पूरे भारत के लोगों को इसका सदस्य बढ़ाना चाहते थे
- ये देश के लोगो के साथ इंसाफ चाहते थे।
- मुस्लिम लीग(1906 ई०) :- 30 दिसंबर 1906 ई० को ढाका के जवाब सलीमुल्लाह खान तथा आगा खान शे मिलकर मुस्लिम के हितो की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग की स्थापना की। ये मुसलमानों को प्रशासन में उचित स्थान दिलाने के पक्षधर थे।
- बंगाल विभाजन(1905 ई०):- भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन ने प्रशासन में असुविधा के नाम पर (फूट डालो और शासन करो) के नीति का पालन करते हुए बंगाल का विभाजन कर दिया तथा बिहार, बंगाल, उड़ीसा को असम से अलग कर दिया।
- सूरत अधिवेशन(1907 ई०):- 1907 ई० में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन सूरत में हुआ। जिसमें अध्यक्ष पद पर बाल गंगाधर तिलक तथा गोपाल कृष्ण गोखले (गांधी जी के राजनैतिक गुरु) के बीच मतभेद होने के कारण कांग्रेस में फूट पड़ गया तथा कांग्रेस दो दलों में विभक्त हो गया।
- नरम दल या उदारवादी दल
- गरम दल या उग्रवादी दल
इस प्रकार सूरत अधिवेशन के बाद कांग्रेस पर गरम दल का दबदबा कायम हो गया।
- गांधी युग (1915 ई० से 1947 ई० तक) :-
1893 ई० मे गांधीजी एक केस के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए जहां उन्होंने सत्याग्रह और सत्य, अहिंसा के बल पर काले लोगों को न्याय दिलाया।
1915 ई० में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए तथा अंग्रेजों के न्यायप्रियता में विश्वास करते हुए प्रथम विश्वयुद्ध (1914 - 1918) में अंग्रेजों का सहयोग किया जिससे अंग्रेजों ने उन्हें कैसर-ए-हिंद की उपाधि दी।
- मोहनदास को बापू या राष्ट्रपिता के नाम से सुभाष चंद्र बोस ने संबोधित किया था।
- मोहनदास को (गांधी) शब्द से सबसे पहले रविंद्र नाथ टैगोर ने संबोधित किया। मोहनदास
- लखनऊ पैक्ट या लखनऊ सम्मेलन(1916ई०):- 1916 ई० में कांग्रेस के लखनऊ सम्मेलन में नरम दल और गरम दल एक हो गए और कांग्रेस मिलजुलकर देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने लगे इस सम्मेलन में नरम दल और गरम दल दोनो के बीच समझौता हो गया तथा कांग्रेस पुनः एक होकर देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने लगे।
- प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) :- प्रथम विश्वयुद्ध 1914 ई० से शुरू होकर 1918 ई० में समाप्त हुआ। प्रथम विश्व युद्ध में अग्रेजो के न्यायप्रियता में विश्वास करते हुए गांधी जी ने अंग्रेजों का साथ दिया जिससे खुश होकर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें कैसर-ए-हिंद की उपाधि दी और आश्वासन दिया की युद्ध में सफलता के बाद भारत को एक अच्छा उपहार देंगे।
- रौलेट एक्ट(1919 ई०):- प्रथम विश्वयुद्ध की समाप्ति पर 1919 ई० में अंग्रेजो ने भारत को रौलट एक्ट नामक उपहार दिया जिसके अनुसार भारत के किसी भी व्यक्ति को शक के आधार पर बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है तथा बिना मुकदमा चलाए उसे सजा दी जा सकती है।
गांधीजी ने इसे काला कानून कहा तथा इस कानून को पूरे भारत के लोगो द्वारा पुरजोर विरोध किया गया।
- जालियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919 ई०) :- प्रथम विश्वयुद्ध के समाप्ति पर रोलेट एक्ट अंग्रेजों द्वारा भारत में लागू किया गया और इसी एक्ट के तहत पंजाब की किचलु भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया जो वहां के अच्छे नेता थे। इन्हीं से संबंधित बातें करने के लिए पंजाब के अमृतसर के जालियावाला बाग में लोग सभा कर रहे थे जिसमें सिर्फ एक छोटा दरवाजा था।
गांधीजी ने इसका काफी निंदा किए तथा इसके विरोध में उन्होंने अपनी कैसर-ए-हिंद की उपाधि वापस कर दी।
- खिलाफत आन्दोलन (1919 ई०):- प्रथम विश्वयुद्ध के समय (1914 - 1918) तुर्की में मुस्तफाकमाल पासा के द्वारा मुसलमानों के धार्मिक गुरु खलीफा के पद को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। तुर्की को अंग्रेजों का समर्थन प्राप्त था। आ भारत के मुसलमान अंग्रेजों को अपना दुश्मन समझ बैठे और 1919 ईसवी में खिलाफत आंदोलन छेड़ दिए।
खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए सभी मुसलमान गांधीजी के पास गए और गांधीजी खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व अपने हाथों में ले लिया।
- असहयोग आन्दोलन (1920 - 1922):- 1920 ई० में गांधीजी खिलाफत आंदोलन को नया रूप प्रदान करते हुए भारत में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हुए अंग्रेजो के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर का आंदोलन, असहयोग आन्दोलन छेड़ दिए।
- साइमन कमीशन(1927-1928):- 1919 ई० में मौन्टेग्यू चैम्सफाॅर्ड घोषणा के अनुसार भारत में संवैधानिक विकास की बातें की गई जिसके लिए 1927 ई० में ब्रिटेन में जार्ज साइमन की अध्यक्षता में साइमन कमीशन का गठन किया गया। जिसमें सात सदस्य थे और सबके-सब अंग्रेज थे इनमें कोई भारतीय नहीं था।
पता 1928 ई० में साइमन कमीशन के भारत आते ही साइमन कमीशन का पुरजोर विरोध किया गया। लाला लाजपत राय ने साइमन वापस जाओ के नारा के साथ काफी विरोध किया जिसके कारण अंग्रेजों ने उन पर लाठी चलवा दी और उनकी मौत हो गई परंतु विरोध इतना व्यापक था की साइमन कमीशन को वापस जाना पड़ा।
- लाहौर अधिवेशन(1929):- पाकिस्तान के रावी नदी के तट पर 1929 ई० में लाहौर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुई जिसमें उन्होंने पहली बार स्वराज्य की बातें की तथा यह घोषणा हुई की अगले साल 26 जनवरी 1930 ई० को पूरे भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
अतः 26 जनवरी 1930 ई० को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया परंतु हम लोग वास्तविक रुप से स्वतंत्र नहीं हुए थे।
- नोट :- उपर्युक्त घटना के कारण ही 26 नवंबर 1949 ई० को आजादी के बाद हमारे देश के सवधान की पूर्ण रूप से बनने के बावजूद भी उसे तुरंत लागू नहीं किया गया बल्कि 26 जनवरी 1950 ई० को संविधान लागू कर देश को गणतंत्र घोषित कर दिया गया।
- सविनय अवज्ञा आन्दोलन (1930 ई०):- 1930 ई० में गांधीजी ने देश की स्वतंत्रता के लिए साबरमती आश्रम से दांडी तक 250 किमी० की यात्रा 72 अनुयायियों के साथ पैदल तय करके दांडी पहुचे तथा नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरूआत कर दी। इस आन्दोलन के पीछे निम्नलिखित कारण थे --
- साइमन कमीशन -- (1927 - 1928)
- नेहरू रिपोर्ट -- (1929 ई० में )
- विश्व आर्थिक मंदी -- (1929 ई०)
- अंग्रेजो की नीति
- समाजवाद का बदला प्रभाव
- स्वराज्य की अवधारणा -- (1929 ई०)
इस प्रकार 1915 ई० से 1947 ई० तक के काल को गांधी युग के नाम से जाना जाता है। जिसमें गांधीजी ने सिर्फ तीन हथियार -- सत्य, अहिंसा, तथा सत्याग्रह के बल पर देश को आजादी दिलाई तथा देश के राष्ट्रपिता कहलाए।
- स्वराज्य पार्टी (1923 ई०):- 1922 ई० में असहयोग आन्दोलन के अचानक बंद हो जाने से नाराज होकर चितरंजन दास तथा मोतीलाल नेहरू ने क्रमशः अध्यक्ष पद तथा महामंत्री पद से त्याग दे दिए तथा 1923 ई० में इन लोगों ने स्वराज्य पार्टी की स्थापना की।
इन लोगों का विचार था कि विधान परिषद का बहिष्कार न किया जाए बल्कि सरकार के अंग में शामिल होकर सरकार के साथ असहयोग किया जाए।
- बिहार का किसान आन्दोलन(1917,22-23,28-29):-
वास्तव में किसान आंदोलन अंग्रेजों द्वारा चंपारण में चलाए जा रहे नील की खेती के तीनकठिया व्यवस्था (3/20 कट्ठा) के खिलाफ चलाया गया आंदोलन था। चंपारण में किसानों को प्रत्येक 20 कट्ठा जमीन पर 3 कट्ठा जमीन पर नील की खेती करना अनिवार्य था तथा अंग्रेज नील की खेती पर किसानों को बहुत कम मेहनताना दिया करते थे तथा नील की खेती नहीं करने पर प्रताड़ित किया करते थे।
अतः नील की खेती के खिलाफ गांधीजी द्वारा 1917 ई० में बिहार में चंपारण आंदोलन के नाम से किसान आंदोलन चलाया गया और गांधीजी नीलहो को न्याय दिलाने में सफल रहे।
आगे 1922 ई० से 1923 ई० में बिहार के मुंगेर में शाह मुहम्मद जुबैर के द्वारा किसान सभा स्थापित हुई। पुनः 1928 ई० में पटना जिला के बिहटा में 4 मार्च 1928 ई० को स्वामी सहजानंद सरस्वती के द्वारा किसान सभा की स्थापना की गई जिसके सचिव श्री कृष्ण सिंह थे।
(यही श्री कृष्ण सिंह आगे चलकर बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री बने)
- एटक क्या है?
- मेरठ षडयंत्र क्या है?
अतः उनपर आरोप लगाकर अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिए तथा उन्हें मेरठ लाकर मुकदमा चलाया गया। इसे ही मेरठ षडयंत्र के नाम से जाना जाता है।
- उपनिवेश क्या है?
- औधोगिकरण क्या है?
औद्योगिकरण के कारण :-
औद्योगिकरण के निम्नलिखित कारण थे --
- भौगोलिक खोजे
- पुर्नजागरण कि शुरूआत
- आवश्यकता आविष्कार की जननी
- कच्चे माल कि कमी
- मशीनो का आविष्कार
- तैयार माल कि खपत
- कोयले तथा लोहे की प्रचुरता
- फ्लाईंग शटल, वाष्प ईंजन, विधुत बल्ब, सेफ्टी लैंप इत्यादि कि खोजें औद्योगिक क्रांति को जन्म दिया। वाष्प इंजन (जेम्स वाट) , टेलीग्राम (ग्राहम बेल) , स्पिनिंग जेनी (जेम्स हरग्रीब्ज 1764 ई०), वायुयान (राइट बंधु) , रेलमार्ग , विद्युत , फोटोग्राफी ।
- औद्योगिकरण के प्रभाव / परिणाम :- औद्योगिकरण के निम्नलिखित परिणाम हुए-
- उत्पादन में बढ़ोतरी हो गई ।
- नया पूंजीपति वर्ग का उदय हो गया।
- श्रमिको और मजदूर वर्ग की भी उत्पत्ति हो गई।
- नगरों का विकास होने लगा।
- समाज में नया बुर्जुआ वर्ग की उत्पत्ति हो गई ।
- साम्राज्यवाद की उत्पत्ति हुई।
- औद्योगीकरण से उपनिवेशवाद की स्थापना हुई।
- उपनिवेश हो मैं भी राष्ट्रवाद की भावना विकसित हो गई।
- औद्योगिकरण के फलस्वरुप मजदूरों तथा श्रमिकों के लिए स्लम पद्धति की शुरुआत हो गई।
- स्लम पद्धति क्या है? (गंदी बस्ती)
- बुर्जुआ वर्ग क्या है?
- निरूधौगीकरण क्या है?
- लघु उद्योग तथा कुटीर उद्योग क्या है?
लघु उधोग :-
वह उद्योग जिसमें बहुत ही कम पूंजी लगाकर घरेलू स्तर पर उत्पादन शुरू किया जाता है उसे लघु उद्योग या घरेलू उद्योग के नाम से जाना जाता है।
- ग्रामीण तथा नगरीय जीवन में क्या अंतर है?
ग्रामीण जीवन :-
- गांव की आबादी कम होती है।
- गांव में लोग कृषि तथा पशु पालन पर आश्रित होते हैं।
- गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा यातायात कि सुविधा कम होती है।
- गांव में जल, मल निकास का उत्तम प्रबंध नहीं होता है।
- गांव में संस्कृति निवास करती है।
- नागर की आबादी में अधिक होती है।
- नागौर में लोग व्यापार, वाणिज्य तथा उत्पादन पर आश्रित होते हैं।
- नगर में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा यातायात की सुविधा गांव की अपेक्षा ज्यादा होती है।
- नगर में जल, मल निकास का प्रबंध गांव की अपेक्षा ज्यादा होता है।
- नगर में बहुरंगी संस्कृति पाई जाती है।
