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| यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय |
☆ यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के क्या कारण थे?
पुनर्जागरण काल से यूरोप में राष्ट्रवाद के बीजारोपण के बाद 18 वीं शताब्दी में 1789 ईसवी की फ्रांसीसी क्रांति से यूरोप में राष्ट्रवाद उन्नत रूप से प्रकट हो गई। वास्तव में राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगो में एकता कायम करती है।
यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के निम्नलिखित कारण थे :-
- सामन्तवादी व्यवस्था :- इस व्यवस्था से आम जनता की स्थिति कस्टमय तथा दयनीय हो गई थी जिससे वे उच्च वर्ग से घृणा करने लगे थे।
- फ्रांसीसी क्रांति :- 1789 ई० की फ्रांसीसी क्रांति ने यूरोप को प्रभावित किया तथा सबमें राष्ट्रवाद की भावना का संचार हुआ।
- नेपोलियन बोनापार्ट :- नेपोलियन बोनापार्ट के आक्रमणों ने जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रिया तथा रूस के साथ- साथ लगभग पूरे यूरोप में राष्ट्रवाद की भावना का संचार कर दिया।
- राष्ट्र-प्रेम कि भावना का विकास :- पुनर्जागरण के फलस्वरूप सभी यूरोपीय देशों में राष्ट्रवाद तथा राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो गई।
- मध्यम एंव श्रमिक वर्ग का उदय :- औधोगिक क्रांति ने पूरे यूरोप में श्रमिक वर्ग का उदय किया जो माध्यम वर्गीय लोगो के साथ मिलकर शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने लगे, फलतः दोनों वर्ग के उदय से यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय हो गया।
☆ इटली के एकीकरण में मेजनी, गैरीबाल्डी तथा काउण्ट कावूर के योगदानो को लिखे ?
- मेजनी :- मेजनी को इटली के एकीकरण का पैगंबर कहा जाता है क्योंकि सर्वप्रथम इसी ने इटली के एकीकरण के लिए प्रयास शुरू किया था। यह एक योग्य सेनापति, साहित्यकार के साथ- साथ गणतांत्रिक विचारों का समर्थक था। वह वहां के क्रांतिकारी दल कार्बोनरी का सदस्य बनकर 1831 ई० में यंग इटली तथा 1834 ई० में यंग यूरोप की स्थापना की जिसका उद्देश्य था इटली में गणतांत्रिक भावना का विकास करना। परंतु ऑस्ट्रिया के हस्तक्षेप के कारण इटली के एकीकरण का प्रयास असफल रहा। मेजनी ने जनार्दन जनता तथा यंग इटली का नारा दिया परंतु वह एकीकरण करने में असफल रहा।
- गैरीबाल्डी :- पेशा से एक नाविक होने के बावजूद गैरीबाल्डी एक महान राष्ट्रवादी था। इटली के एकीकरण के लिए वह एक क्रांतिकारी संगठन यंग इटली का सदस्य बना तथा लाल सेना का गठन किया जिसके कारण इसे मृत्युदंड की सजा मिली परंतु वह भागकर विदेश चला गया। पुनः 1848 ई० में फ्रांसीसी क्रांति के समय वापस इटली आया तथा इटली के एकीकरण का तलवार बनकर इटली के एकीकरण के लिए लगातार प्रयास किया। दक्षिण इटली के रियासत के एकीकरण का श्रेय इसी को जाता है।
- काउण्ट काबूर :- काउण्ट काबूर एक सरल कूटनीतिज्ञ तथा राष्ट्रवादी था। इसलिए एकीकरण के लिए वह विदेशी सहायता से आर्थिक उन्नति तथा सैनिक शक्ति पर बल दिया। वह इटली की समस्या को अंतरराष्ट्रीय समस्या बनाकर इटली का विरोधी ऑस्ट्रिया को पराजित करना चाहता था, अतः फ्रांस से मित्रता भी किया। 1850 ईसवी में काउंट कावूर सर्डिनिया - पिडमौंट के राजा विक्टर इमैनुएल का कृषि, व्यापार एवं नौ - शक्ति का मंत्री बना तथा 1852 ई० मे उसका प्रधानमंत्री बना। 1859 ई० में उसने फ्रांस की सहायता से ऑस्ट्रिया को पराजित किया तथा 1860 ई० में सिसली के राजा को पराजित कर सिसली को भी सर्डिनिया पिडमौंट में मिला दिया। यही सर्डिनिया पिडमौंट आगे चलकर इटली के नाम से विख्यात हुआ। इस प्रकार इटली का अधिकतम एकीकरण ने किया। परंतु 1862 में इसकी भी मृत्यु हो गई।
यूरोपीय स्वतंत्रता आन्दोलन के बारे में पूरे विस्तार से लिखे ?
यूरोपीय देशों मैं यूनान एक बहुत ही प्राचीन देश है , जिसकी राजधानी ग्रीस थी। अपनी प्राचीन साहित्य, कला, दर्शन, चिकित्सा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण या गौरवशाली राष्ट्र था, जो धीरे - धीरे पतन हो गया आर 15 वी शताब्दी में यह तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य का एक अंग बन गया।
पुनः 19 वी शताब्दी में फ्रांसीसी क्रांति (1789 ई०) से प्रेरित होकर यूनानीयो ने तुर्की साम्राज्य के खिलाफ राष्ट्रीयता की भावना दिखाते हुए हितेरिया फिलाइका नामक संस्था की स्थापना की तथा तुर्की शासन से मुक्ति के लिए स्वतंत्रता आंदोलन शुरू कार दिए।
1821 ई० मे यूनानीयो ने तुर्की साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह शुरुआत कर दी जो अलेक्जेंडर चिपसिलांटी के नेतृत्व में मोल्डेविया में प्रारंभ हुआ। परंतु 3 महीने के भीतर ही तुर्की ने इसे दबा दिया ।
यूनानी आंदोलन को पूरे विश्वा का समर्थन मिलने लगा क्योंकि यह एक पुराना गौरवशाली देश था अतः आगे इसे रूस का स्पष्ट समर्थन मिलने लगा तथा ब्रिटेन का भी समर्थन मिलने लगा था।
1827 ई० मे इंग्लैंड फ्रांस तथा रूस ने लंदन में एक सम्मेलन कर तुर्की के खिलाफ यूनान को समर्थन देने की बात कहीं। उधर तुर्की को मिस्र की सेना का समर्थन नीला। नवारिनो की खाड़ी के दोनों पक्षों मे युद्ध हुआ जिसमें तुर्की और मिस्र बुरी तरह पराजित हुआ। विवश होकर 14 सितम्बर 1829 ई० को तुर्की ने रूस के साथ (यूनान के लिए) एड्रियानोपुल की संधि की।
नोट :-
- क्रीमिया का युद्ध :- फ्रांस तथा आस्ट्रिया के बीच 1859 ई० में हुआ।
- सेडान का युद्ध :- फ्रांस तथा प्रशा के बीच 1871 ई० में हुआ।
- सेडोवा का युद्ध :- आस्ट्रो तथा प्रशा के बीच 1866 ई० में हुआ। इसे सेरेजोवा का युद्ध या आस्ट्रो - प्रशा का युद्ध भी कहते हैं।
- फ्रैंकफर्ट की संधि :- फ्रांस तथा प्रशा के बीच 10 मई 1871 ई० को हुई ।
- एड्रियानोपुल की संधि :- तुर्की तथा रूस के बीच 14 सितम्बर 1829 ई० में हुई।
- कुस्तुनतुनिया की संधि :- तुर्की तथा यूनान के बीच 1832 ई० में हुई।
- मेटरनिख युग :- आस्ट्रिया के मेटरनिख युग 1815 ई० से 1848 ई० के बीच माना जाता है। इस समय यूनान की स्वतंत्रता राष्ट्रीयता के सिद्धांत की पहली विजय थी।
- सन् 1870 ई० में फ्रांस और प्रशा के बीच युद्ध कहाँ हुआ था? सेडान में
- फ्रांस में किस शासक वंश की पुनर्जागरण वियना कांग्रेस द्वारा कि गई थी? बूर्बो वंश
- मेजनी का संबंध किस संगठन से था? कार्बोनरी से
- इटली और जर्मनी के एकीकरण के विरूद्ध कौन देश था? आस्ट्रिया
- गैरीबाल्डी पेशे से क्या था? नाविक
- रक्त एंव लौह कि नीति का अवलम्बन किसने किया था? बिस्मार्क ने
- जालवेरिन एक संस्था थी ? व्यपारियो की
- चाडिंस्ट आंदोलन कहाँ सम्पन्न हुए? इंग्लैण्ड में
- यूरोपवासियो के लिए किस देश का साहित्य एंव ज्ञान - विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा ? यूनान का
- यूरोप का मरीज किसे कहते हैं? तुर्की को
- जर्मन राइन संघ का निर्माण किसने किया था? नेपोलियन बोनापार्ट ने
- 1829 ई० कि एड्रियानोपुल कि संधि किन दो देशों के बीच हुआ था? तुर्की और रूस के बीच
- काउण्ट कावूर को बिक्टर इमैनुअल ने किस पद पर नियुक्त किया था? प्रधानमंत्री के
- बिस्मार्क क्या था? कूटनीतिज्ञ
- इटली एंव जर्मनी वर्तमान में किस महादेश के अंतर्गत आते है? यूरोप के
- फ्रैंकफर्ट कि संधि कब हुई थी ? 10 मई 1771 को फ्रांस तथा प्रशा के बीच
- कुस्तुनतुनिया कि संधि? 1832 मे तुर्की तथा यूनान के बीच
- सेडान का युद्ध:- 1870 मे फ्रांस तथा प्रशा के बीच
- सेडोवा का युद्ध:- 1866 मे आस्ट्रो तथा प्रशा के बीच ---- सेरेजोवा का युद्ध भी कहते हैं।
- क्रीमिया का युद्ध:- 1859 में फ्रांस तथा आस्ट्रिया के बीच
- मेटरनिख युग :- 1815 से 1848 तक
- मेजनी ने कौन - सा दल बनाया था? :- मेजनी ने 1831 में यंग इटली तथा 1834 में यंग यूरोप का दल बनाया था।
- भारत आने वाला पहला यूरोपीय कौन था? :- पुर्तगाली (बास्कोडिगामा)
- वेनिस ने स्वतंत्रता कि घोषणा कब कि ? :- 22 मार्च 1848 को

