संधि किसे कहते हैं? संधि कितने प्रकार के होते हैं ? Sandhi kise kahate hai? Sandhi kitne prakar ke hote hai?

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हाय फ्रेंड्स 

मैं प्रिन्स कुमार ।
आज हम सब संधि के बारे में जानेंगे कि  संधि किसे कहते हैं?
तथा संधि के कितने प्रकार होते हैं  ? क्योंकि इसके बारे में पुरे विस्तार से जानने कि कोशिश करेंगे । क्योंकि किसी भी Exams में जैसे कि 10th / 11th/ 12th तथा इससे High Level के Exams में  इससे बहुत सारे प्रश्न पूछे जाते है । तो चलिए शूरू करते है ।

 संधि 

Q.    संधि किसे कहते है?

उत्तर:-   दो वर्णो के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है उसे संधि कहते है ।
  संधि में पद या शब्द को तोडने कि क्रिया को विच्छेद कहते है ।

संधि मुख्यतः तीन प्रकार के होते है।

  1.    स्वर संधि 
  2.    व्यंजन संधि 
  3.    विसर्ग संधि 

            स्वर संधि

1>  स्वर संधि किसे कहते है?
उत्तर :-   स्वर वर्णो के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है उसे स्वर संधि कहते है।
  1.   पुस्तक + आलय = पुस्तकालय 
            क + आ = का (अ + आ = आ )

  2.   विद्या+आलय= विद्यालय    [ आ + आ = आ ]

  3.   तथा+एव= तथैव  [आ+ए= ए ]

 4.   पो +अन =पवन  [ओ +अ =अव ] 


1.    दीर्घ संधि  :-  (आ,ई,ऊ)
           आ , ई ,और  ऊ को दीर्घ संधि कहते है।
  अ + अ = आ ,           आ + अ = आ,
   अ +आ = आ ,           आ + आ = आ,
   इ + इ = ई ,               ई + इ = ई ,
   इ + ई = ई ,               ई + ई = ई ,
   उ + उ = ऊ ,             ऊ + उ = ऊ,
   उ + ऊ = ऊ ,            ऊ + ऊ = ऊ,

2.      गुण संधि  :-    ( ए ,ओ ,अर )
    सु + आगत = स्वागत,

5. अयादि संधि :- (अय,आय,अव,आव)

जैसे:-   ने +अन= नयन   [ए +अ =अय ]

 ☆  स्वर संधि मुख्यतः पाॅच प्रकार के होते हैं।

  (1)  गुण संधि :-

                 ए , ओ , और  अर् को गुण संधि कहते है।

    जैसे  :- 

      अ / आ + इ / ई = ए ,

      अ / अ + उ/ ऊ = ओ ,

       अ / आ +  ऋ = अर्  ,

     जैसे :- 

        महा + ईश = महेश ,

       देव + उत्थान = देवोत्थान, 

       देव + ऋषि  = देवर्षि,

  3.       वृद्धि संधि  :-  (ऐ ,औ)

              ऐ तथा औ को वृद्धि संधि कहते है।

   जैसे :- 

  अ+ए =ऐ,      आ+ओ= औ, 

    तथा + एव = तथैव, 

   देव + ओषधि = देवौषधि,

 4.    यण संधि :-  (य,र,ल,व)

          य , र , ल तथा व को यण संधि कहते है।

   इ+अ=य,       ऋ +अ = र,

   लृ+अ =ल,       उ+अ = व,

   इ+आ=या,      उ+आ=वा,

   जैसे :-

   अधि+आपक = अध्यापक ,

   पितृ + आदेश = पित्रादेश ,

   सु + अक्ष = स्वच्छ ,

      ए+अ=अय,              ऐ+अ=आय,

     ओ+अ=अव,            औ+अ= आव,

    जैसे  :-

     ने+अन= नयन,          चे+अन=यन,

     गै+अक=गायक,       गै+इका=गायिका ,

    पो+अन=पवन,      पौ+अक=पावक, 

    रौ+अन=रावण,        पो+इत्र=पवित्र,

  ☆  कुछ अति महत्वपूर्ण संधि :-

  महोत्सव = महा + उत्सव ,

  महेश्वर = महा + ईश्वर ,

   सर्वागसम = सर्व+अंग+सम ,

   स्वागतम = सु + आगतम ,

   राजर्षि = राज + ऋषि ,

   रमेश = रमा + ईश ,

   विधार्थी = विधा + अर्थी ,

   शिष्टाचार = शिष्ट + आचार ,

   सप्तऋषि = सप्त + ऋषि ,

   सत्यमेव = सत्यम + एव ,

         व्यंजन संधि  

जब दो वर्णो के मेल के मेल में पहला वर्ण , व्यंजन वर्ण हो तथा दूसरा वर्ण स्वर या व्यंजन वर्ण कोई भी हो तो उसके मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है उसे व्यंजन संधि कहते है।

                इस प्रकार के संधियो में प्रायः पहला वर्ण, अपने वर्ग के तीसरे या पाॅचवे वर्ण में बदल जाते है।

जैसे:- 

      दिक्+गज=दिग्गज,          सत्+आचार =सदाचार,

      सत्+गुण=सदगुण,            जगत्+नाथ=जगन्नाथ,

      जगत्+ईश=जगदीश,          तट्+टीका= तट्टीका,

    अहम्+कार=अहंकार,          सम्+कृत= संस्कृत, 

     सम्+कार=संस्कार,             सम्+सार= संसार, 

     सम्+गम=संगम,                उत्+ज्वल=उज्जवल,

    उत्+मुख=उन्मुख,               उत्+लेख= उल्लेख,

    तत्+लीन= तल्लीन,              तत्+हित= तहीत,

    प्रति+स्था= प्रतिष्ठा,             पृष्ठ् +थम् = पृष्ठम् ,  

    पृष् +थ= पृष्ठ,                    यज् +ग= यज्ञ ,   

    वाक् +मय = वाङ्मय,         सत्+उक्ति = सदुक्ति,  

    सम् + चित् + आनंद = सच्चिदानन्द ,

    सत् + मिटा = सन्मिटा ,  

          विसर्ग संधि 

          दो वर्णो के मेल में जब पहला वर्ण विसर्ग के साथ हो तथा दूसरा वर्ण स्वर या व्यंजन हो तो उनके मिलने से जो विकार उत्पन्न होता है उसे विसर्ग संधि कहते है।

☆ जैसे :- 

   अः +च/छ = स ,                  अः + त/थ = श , 

    अः + ट/ठ = ष ,                 अः + य/र/ल/व =ओ ,


   कः + चित = कश्चित ,          निः + छल = निश्छल  , 

   तिरः+कार=तिरस्कार,          दुः +आचार= दुराचार ,  

   निः + धन= निर्धन  ,             निः +रोग = निरोग ,    

   निः +मल= निर्मल ,              निः +जन= निर्जन ,    

   निः + चय  = निश्चय ,        बहिः +कार = बहिष्कार ,  

   अभिः +कार= आविष्कार ,      यषः +दा = यशोदा  , 


 आज मैंने संधि के बारे में पुरे विस्तार से बताने कि कोशिश कि तो फ्रेंड्स यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें comments box में जरूर बताएं कि मै और इसी तरह कि जानकारी आपको दू। और अपने दोस्तों के पास जरूर share करे। और जानकारी के लिए हमारे इस पेज को follow जरूर करें ।

                     धन्यवाद!

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