हाय फ्रेंड प्रिंस कुमार आज हम व्याकरण के ध्वनि चैप्टर के बारे में जानेंगे बहुत छोटा टॉपिक है जिसमें सिर्फ ध्वनि और उच्चारण स्थान के बारे में जानेंेगे इसस अगर कोई प्रश्न आपको पूछना है तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें तो चलिए शुरू करते हैं
■ ध्वनि किसे कहते हैं? और उच्चारण स्थान कितने प्रकार के होते हैं?
▪ ध्वनि:-
हिर्दय से निकली प्राणवायु मुंह के किसी भाग से टकराकर जिस रूप में बाहर निकलती है उसे ध्वनि कहते हैं|
या फिर हम कर सकते हैं कि वर्ण वह मूल ध्वनि है जिसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते।
▪ उच्चारण स्थान :-
हिर्दय से निकली हुई प्राण वायु (ध्वनि) मुख के जिस स्थान से टकराकर बाहर निकलती है उसे उच्चारण स्थान कहते हैं।
▪ उच्चारण स्थान की दृष्टि से वर्णो को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है।
जैसे:
वर्ण उच्चारण स्थान
1. क,ख,ग,घ/अ,आ,अः/ह ------------- कंठ
2 श/च,छ,ज,झ/य/इ,ई ----------------- तालु
3 ष/ट,ठ,ड,ढ/र/ऋ -------------------- मूर्ध्दा
4 प,फ,ब,भ/उ,ऊ -------------------- ओष्ठ
5 ड़,ञ,ण,न,म/अं ----------------------- नासिका
6 व ---------------------- दन्त्योष्ठ
7 ए , ऐ -------------------------- कंठ- तालु
8 ओ , औ ------------------------- कंठ - ओष्ठ
9 स/त,थ,द,ध ------------------------ दन्त्य
● वर्णो के उच्चारण स्थान के लिए इसे याद कर ले।
`अकह' विसर्ग ' कण्ठराम ।`इचयश' भी है तालु राम।।
`ऋटष' से जानो मूद्दर्धा जी । `लृतस' पुकारो दन्त जी।।
`उप ' आते हैं ओष्ठ में । केवल `व ' दन्तोष्ठ में ।।
`ए-ऐ' कहे कण्ठ-तालु । `ओ-औ' कहे कण्ठोष्ठ में ।।
नासिका से पंचमाक्षर । जिहवा रखो प्रकोष्ठ मे ।।
☆☆☆ नोट प्लुत स्वर वर्ण :-
जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी ज्यादा समय लगता है उसे स्वर्ग कहते हैं।
ध्वनि का जो टॉपिक था वह खत्म हुआ ध्वनि में ज्यादातर उच्चारण स्थान और ध्वनि के बारे में जानाना होता है जिसे हमने जान लिया अगर इस से रिलेटेड कोई प्रश्न है कमेंट बॉक्स में लिखें इसे अपने दोस्तों या की स्टडी ग्रुप में शेयर करे।
धन्यवाद!


Good job
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